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43 वर्षीय व्यक्ति की मौत मामले में मोहाली के मैक्स अस्पताल और डॉक्टर दोषी करार

01 Aug, 2026 02:59 PM

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने वर्ष 2013 में 43 वर्षीय ऋषि गुप्ता की पेसमेकर लगाए जाने के बाद हुई मृत्यु से जुड़े मामले में पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग के फैसले को बरकरार रखा है। आयोग ने मोहाली के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और उसके कंसल्टेंट डॉक्टर डॉ. सुधीर सक्सेना को चिकित्सा लापरवाही और सेवा में कमी का दोषी मानने वाले राज्य आयोग के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। आयोग ने मैक्स अस्पताल की अपील खारिज करते हुए कहा कि राज्य आयोग का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के उचित परीक्षण पर आधारित है। इसलिए उसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। शिकायतकर्ता पूजा गुप्ता के अनुसार, उनके पति ऋषि गुप्ता (43) को 17 सितंबर 2013 को सीने में तेज दर्द होने पर मोहाली स्थित मैक्स अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। इससे पहले 27 वर्ष की आयु में उनकी बायपास सर्जरी (CABG) हो चुकी थी। इसके बाद डॉ. सुधीर सक्सेना ने उन्हें पेसमेकर लगाने की सलाह दी और चार दिन के उपचार के लिए लगभग 5.5 लाख रुपये का पैकेज तय किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 20 सितंबर को 3 लाख रुपये जमा कराने के बाद ही मरीज को सर्जरी के लिए ले जाया गया। आरोप है कि पूरी किट उपलब्ध न होने के बावजूद डॉक्टर ने 45,000 रुपये कीमत का डबल चैंबर पेसमेकर लगाया और तीसरी तार उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए प्रक्रिया अधूरी छोड़ दी। इसके बाद 22 सितंबर को दूसरी सर्जरी कर 4,47,869 रुपये कीमत का बाइवेंट्रिकुलर पेसमेकर लगाया गया, जो पहले लगाए गए पेसमेकर को बदलने के लिए था। शिकायत के अनुसार, 24 सितंबर को मरीज को दर्द की शिकायत के बावजूद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 27 सितंबर को ऋषि गुप्ता को दोबारा गंभीर हृदयाघात हुआ और अस्पताल ले जाते समय उनकी मृत्यु हो गई। मेडिकल लापरवाही, धोखाधड़ी और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों का आरोप लगाते हुए पूजा गुप्ता ने 84.73 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी। इसके बाद 4 मई 2017 को पंजाब राज्य आयोग ने डॉ. सुधीर सक्सेना और मैक्स अस्पताल को दोषी ठहराते हुए शिकायतकर्ता को 9 प्रतिशत व्यावसायिक ब्याज सहित 32.94 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान अस्पताल ने अपने बचाव में कहा कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उपचार दो चरणों में किया गया था और कोई दूसरा पेसमेकर नहीं लगाया गया था। अस्पताल ने यह भी कहा कि बिल में डबल चैंबर पेसमेकर का उल्लेख सॉफ्टवेयर की तकनीकी त्रुटि के कारण हुआ था। बचाव पक्ष ने पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। हालांकि, राष्ट्रीय आयोग ने राज्य आयोग के निष्कर्षों से सहमति जताते हुए कहा कि अस्पताल और डॉक्टर मेडिकल रिकॉर्ड तथा बिलों में पाई गई गंभीर विसंगतियों और विरोधाभासों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। आयोग ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य चिकित्सा लापरवाही और सेवा में कमी को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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