डिजिटल पेमेंट यूजर्स के लिए बड़ी राहत: ₹2,000 तक का UPI और RuPay भुगतान रहेगा बिल्कुल फ्री
केंद्र सरकार ने देश में डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर जारी चर्चाओं और आशंकाओं के बीच स्थिति साफ करते हुए एक नया राजपत्रित आदेश (Gazette Notification) जारी किया है। वित्त मंत्रालय द्वारा 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' की धारा 10A के तहत जारी इस गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को ₹2,000 तक के यूपीआई (UPI) लेनदेन और RuPay डेबिट कार्ड के माध्यम से किए जाने वाले भुगतानों पर किसी भी प्रकार का शुल्क वसूलने से रोक दिया गया है। संसद में हाल ही में कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक पारित होने के बाद से ही डिजिटल भुगतानों पर शुल्क या टैक्स लगाए जाने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। इस पर विराम लगाते हुए सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ₹2,000 तक के छोटे डिजिटल लेनदेन उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के लिए पूरी तरह से शुल्क-मुक्त रहेंगे। आदेश के मुताबिक, बैंक या भुगतान प्रणाली प्रदाता किसी भी व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं वसूल सकते। आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, जहां ₹2,000 तक के लेनदेन पूरी तरह से निशुल्क रहेंगे, वहीं इस सीमा से अधिक राशि के बड़े लेनदेन पर शुल्क या मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का विकल्प खुला रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में MDR लागू भी होता है, तो वह केवल एक निश्चित सीमा के बाद कुछ विशेष व्यावसायिक (Merchant) लेनदेन पर ही लागू होगा और आम ग्राहकों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। MDR वह शुल्क होता है जो कोई व्यापारी डिजिटल भुगतान सेवा का उपयोग करने के बदले बैंकों या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देता है। इससे पहले संसद के निचले सदन (लोकसभा) में भारी शोर-शराबे और बिना विस्तृत चर्चा के 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' में संशोधन करने वाला महत्वपूर्ण विधेयक पास किया गया था। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य उस कानूनी प्रावधान को समाप्त करना था जो बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने से रोकता था। वर्तमान में RTGS और NEFT के माध्यम से होने वाले रियल-टाइम ट्रांसफर पर सेवा शुल्क लागू होता है, जबकि UPI लेनदेन को इन सभी शुल्कों से छूट मिली हुई थी। हालांकि, इस नए संशोधन के बाद अब सरकार को यह अधिकार मिल गया है कि वह बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को UPI तथा अन्य अधिसूचित डिजिटल माध्यमों से होने वाले बड़े भुगतानों पर MDR या शुल्क वसूलने की अनुमति दे सके। आने वाले दिनों में यह निर्णय देश की डिजिटल लेनदेन प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
Posted By: Daily Suraj Bureau