1984 सिख नरसंहार: सज्जन कुमार के खिलाफ कार्रवाई में 2009 की राज्यसभा बहस रही अहम
नवंबर 1984 के सिख नरसंहार मामले में जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की मौत के बाद पूर्व सांसद तरलोचन सिंह ने दावा किया है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने में वर्ष 2009 में राज्यसभा में हुई बहस की अहम भूमिका रही थी। तरलोचन सिंह, जो राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा के पूर्व सदस्य रहे हैं, ने बताया कि घटना वर्ष 1984 में हुई थी, लेकिन सज्जन कुमार के खिलाफ पुलिस द्वारा आपराधिक मामला वर्ष 2011 में दर्ज किया जा सका। उनके अनुसार, संसद सदस्य रहते हुए उन्होंने इस मुद्दे पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव पर 14 दिसंबर 2009 को राज्यसभा में बहस हुई थी। इस मुद्दे पर दिनभर चर्चा चली। तरलोचन सिंह के मुताबिक, चर्चा के बाद तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम को 15 दिनों के भीतर सज्जन कुमार के खिलाफ मामला दर्ज करने की घोषणा करनी पड़ी। तरलोचन सिंह ने बताया कि यह प्रक्रिया जनवरी 2011 में पूरी हुई। इसके करीब सात साल बाद अदालत ने सज्जन कुमार को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। पूर्व सांसद ने कहा कि 2009 में राज्यसभा में हुई उस बहस के कारण 1984 के सिख नरसंहार के 27 साल बाद सज्जन कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल सकी। गौरतलब है कि वर्ष 1984 में दिल्ली में हुए सिखों के सामूहिक नरसंहार में 7000 से अधिक निर्दोष सिखों की जान गई थी। इस मामले में कई कांग्रेस नेताओं को नामजद किया गया था, जिनमें सज्जन कुमार भी शामिल थे। सज्जन कुमार की बीते दिन दिल्ली की जेल में उम्रकैद की सजा काटते हुए मौत हो गई।
Posted By: Daily Suraj Bureau