कैनेडा में साल भर 'डेलाइट सेविंग टाइम' लागू करने की तैयारी, विशेषज्ञों ने जताई सेहत बिगड़ने की आशंका
कैनेडा के कई प्रांतों द्वारा पूरे वर्ष 'डेलाइट सेविंग टाइम' (गर्मियों का समय) लागू करने की योजनाओं के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसके प्रतिकूल प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे साल घड़ियों को एक घंटा आगे रखने से मानव शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) प्रभावित हो सकती है, जो स्वास्थ्य संबंधी कई जटिलताओं को जन्म दे सकती है। यॉर्क यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर पेट्रीशिया लेकिन-थॉमस के अनुसार, सुबह की प्राकृतिक धूप शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक को सही और संतुलित बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक होती है। यदि वर्ष भर गर्मियों वाला समय लागू रहता है, तो लोगों को सुबह के समय प्राकृतिक रोशनी कम मिलेगी, जबकि शाम के समय रोशनी देर तक रहेगी। इस असंतुलन के कारण लोगों की नींद पूरी न होना, हृदय रोग, डायबिटीज (शुगर) और मोटापे का खतरा काफी हद तक बढ़ सकता है। साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ राल्फ मिस्टलबर्गर ने भी इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि समय में इस बदलाव से लोगों की नींद और उनके दैनिक कामकाज के शेड्यूल के बीच का तालमेल बिगड़ सकता है। इसका सबसे बुरा असर बच्चों और युवाओं के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने की संभावना है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञों का सुझाव है कि साल में दो बार समय बदलने या पूरे साल समर टाइम लागू करने के बजाय, वर्ष भर सर्दियों वाला मानक समय (स्टैंडर्ड टाइम) लागू रखना जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अधिक फायदेमंद और सुरक्षित रहेगा।