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अधूरे चालान का हवाला देकर भुल्लर और शारदा ने CBI अदालत में दाखिल की याचिका

16 Mar, 2026 11:10 AM

पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और उनके करीबी सहयोगी कृष्णु शारदा ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा पिछले वर्ष दर्ज भ्रष्टाचार मामले में नोटिस लेने के आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए चंडीगढ़ स्थित सीबीआई अदालत का रुख किया है। सीबीआई अदालत ने 13 मार्च 2026 को मामले में नोटिस लेते हुए कहा था कि रिश्वत की मांग, उसकी स्वीकृति और बरामदगी के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि आरोपियों के बीच आपराधिक साजिश रची गई थी। अदालत ने माना था कि दोनों आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से कार्य करते हुए गलतियां कीं और रिश्वत ली। इसी आधार पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (2018 में संशोधित) की धाराएं 7 और 12 के तहत मामला बनता है। निलंबित डीआईजी ने अपने वकील एसपीएस भुल्लर के माध्यम से सीबीआई की विशेष न्यायाधीश भावना जैन की अदालत में दायर याचिका में कहा है कि अदालत ने उस समय नोटिस ले लिया जब अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत चालान अधूरा था। याचिका में कहा गया कि केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की रिपोर्ट से संबंधित दस्तावेज अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए थे। वकील ने आगे दलील दी कि अभियोजन पक्ष को मिली स्वीकृति भी अवैध है, क्योंकि आरोपी पंजाब सरकार का कर्मचारी है और इस मामले में राज्य सरकार से आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई। इसके अलावा मामले में अधिकार क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) को भी चुनौती दी गई है। इस संबंध में पहले हाईकोर्ट में दायर याचिका वापस ले ली गई थी ताकि बेहतर तथ्यों के साथ नई याचिका दाखिल की जा सके, क्योंकि चालान बाद में प्रस्तुत किया गया था। याचिका में यह भी कहा गया है कि अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं, क्योंकि CFSL की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है और इससे संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। वहीं, सह-आरोपी कृष्णु शारदा की ओर से पेश हुए वकील मतविंदर सिंह ने तर्क दिया कि आदेश पारित करने से पहले न तो सीबीआई के वकील और न ही बचाव पक्ष के वकील की दलीलें सुनी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की किस धारा के तहत पारित किया गया। उन्होंने आगे कहा कि आरोप तय करने के लिए अभी तक मामला निर्धारित भी नहीं किया गया है, क्योंकि मुकदमे से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां अभी भी आरोपियों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। दोनों आरोपियों ने अदालत से अनुरोध किया है कि परिस्थितियों को देखते हुए न्यायहित में नोटिस लेने के आदेश को वापस लिया जाए।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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