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दल-बदल का खेल: 64 सांसद-विधायक सिर्फ तीन दलों से, NPF और बीजेपी में शामिल हुए सबसे ज्यादा नेता

26 Sep, 2026 04:57 PM

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच द्वारा किए गए एक ताजा विश्लेषण के अनुसार, साल 2022 से लेकर अब तक मौजूदा लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए चुने जाने के बाद कुल 111 सांसदों और विधायकों ने अपनी राजनीतिक पार्टियां बदली हैं। इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पार्टी बदलने वाले कुल 111 जनप्रतिनिधियों में से 26 लोकसभा के सदस्य थे, 7 राज्यसभा के सदस्य थे और 78 विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के विधायक थे। इन प्रमुख दलों के नेताओं ने सबसे ज्यादा छोड़ा साथ ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 111 सांसदों और विधायकों ने अपनी मूल पार्टियां छोड़ी हैं, उनमें से आधे से अधिक (64 प्रतिनिधि) केवल तीन राजनीतिक दलों से संबंधित थे। NDPP: सबसे ज्यादा 25 नेताओं (23 प्रतिशत) ने पार्टी बदली। तृणमूल कांग्रेस (TMC): 20 नेताओं (18 प्रतिशत) ने पार्टी छोड़ी। कांग्रेस: 19 नेताओं (17 प्रतिशत) ने इस्तीफा देकर दूसरी राह चुनी। इनके अलावा, भारत राष्ट्र समिति (BRS) के 9, आम आदमी पार्टी (AAP) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के 7-7 नेताओं ने पार्टी बदली। वहीं, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के 6, जनता दल (यूनाइटेड) के 5 और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के 4 नेताओं ने भी दल-बदल किया। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि हाल के दिनों में कुछ राज्यों में सरकारों का गिरना विधायकों के इसी दल-बदल का सीधा परिणाम था। इन पार्टियों में शामिल हुए सबसे ज्यादा जनप्रतिनिधि दूसरी ओर, दल-बदल करने वाले नेताओं को अपने पाले में शामिल करने के मामले में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों का दबदबा रहा: नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF): सबसे आगे रहते हुए 32 जनप्रतिनिधियों (29 प्रतिशत) को अपनी पार्टी में शामिल किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP): 29 नेताओं (26 प्रतिशत) को अपने साथ जोड़ा। नेशनल ईस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI): 20 नेताओं (18 प्रतिशत) को पार्टी में जगह दी। इसके अतिरिक्त कांग्रेस में 9 (8 प्रतिशत), शिवसेना में 8 (7 प्रतिशत), NPP में 6 (5 प्रतिशत) और पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में 4 (4 प्रतिशत) जनप्रतिनिधि शामिल हुए। आंकड़े दर्शाते हैं कि कुल 111 दल-बदल करने वाले नेताओं में से 81 (73 प्रतिशत) अकेले NPF, BJP और NCPI में शामिल हुए। यह पूरा विश्लेषण 2022 से 2026 के बीच आयोजित आम चुनावों और उपचुनावों के आंकड़ों पर आधारित है।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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