अमेरिका की '10 मोस्ट वांटेड' सूची में शामिल हुआ गोल्डी बराड़, हरदीप निज्जर हत्याकांड में भी नाम आया सामने
अमेरिका की प्रमुख जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित भारतीय मूल के गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर शिकंजा कस दिया है। एजेंसी ने गोल्डी बराड़ की गिरफ्तारी में मददगार जानकारी देने वाले के लिए इनामी राशि 1 लाख डॉलर से बढ़ाकर 10 लाख डॉलर (लगभग साढ़े नौ करोड़ भारतीय रुपये) करने की घोषणा की है। इसके साथ ही उसे अमेरिका के सबसे वांछित अपराधियों की '10 मोस्ट वांटेड' सूची में भी शामिल कर लिया गया है। लॉस एंजिल्स (Los Angeles) स्थित कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान FBI के सहायक निदेशक पैट्रिक ग्रैंडी ने बताया कि भारत की जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के सहयोगी गोल्डी बराड़ ने उत्तर अमेरिका (अमेरिका और कनाडा) में सुपारी देकर हत्याएं कराने, लूटपाट और रंगदारी (फ़िरौती) वसूलने जैसे गंभीर अपराधों से दहशत का माहौल पैदा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोल्डी बराड़ को गिरफ्तार करना अब एजेंसी की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल हो चुका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोल्डी बराड़ पर जून 2023 में कनाडा के सरे शहर में स्थित गुरुद्वारा साहिब की पार्किंग में गुरुद्वारा कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश रचने का भी गंभीर आरोप है। इस हत्याकांड में कनाडा पुलिस पहले ही तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार कर चुकी है और मामला वर्तमान में अदालत के समक्ष विचाराधीन है। पत्रकार वार्ता में कनाडा पुलिस की डिप्टी कमिश्नर लिज़ा मोरलैंड भी उपस्थित थीं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई वहीं से उत्तर अमेरिका में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए गोल्डी बराड़ को निर्देश भेजता था। उल्लेखनीय है कि कनाडा सरकार द्वारा बिश्नोई गैंग को आतंकवादी संगठन भी घोषित किया जा चुका है। पुलिस को अंदेशा है कि गोल्डी बराड़ इस समय अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में या कनाडा के किसी गुप्त ठिकाने पर छिपा हुआ है। गौरतलब है कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा संसद में भारतीय एजेंसियों पर लगाए गए आरोपों के कारण दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों में तनाव पैदा हो गया था। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था, जिससे भारतीय मूल के लोगों को वीजा और व्यापारिक गतिविधियों में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, कनाडा के वर्तमान प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस वर्ष फरवरी में भारत का दौरा कर इन संबंधों को पुनः बेहतर बनाने के प्रयास शुरू किए हैं।
Posted By: Daily Suraj Bureau