निलंबित DIG भुल्लर केस में नया मोड़: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विशेष कोर्ट ने जारी किया समन
पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी (DIG) एच.एस. भुल्लर से जुड़े बहुचर्चित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार मामले में एक अहम कानूनी अपडेट सामने आया है। चंडीगढ़ स्थित विशेष सीबीआई (CBI) अदालत की न्यायाधीश भावना जैन ने मामले के मुख्य शिकायतकर्ता आकाश बट्टा को अगले सरकारी गवाह (Prosecution Witness) के रूप में तलब करने की सीबीआई की अर्जी को मंजूरी दे दी है। सीबीआई ने अपने लोक अभियोजक (Public Prosecutor) नरेंद्र सिंह के माध्यम से अदालत में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि रिश्वतखोरी का यह मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है और नियमानुसार सरकारी गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में जब्ती व बरामदगी के गवाह राजकुमार को पहले ही 24 सितंबर, 2026 की तारीख के लिए समन जारी किया जा चुका है। सीबीआई ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि इस मामले के निष्पक्ष और सही निपटारे के लिए मुख्य शिकायतकर्ता आकाश बट्टा की गवाही अत्यंत महत्वपूर्ण है। आरोप पत्र (Charge-sheet) में उसे पहले से ही गवाह के रूप में नामित किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, रिश्वत की मांग, शिकायत दर्ज कराने की परिस्थितियां, ट्रैप (जाल) बिछाने की कार्रवाई और रिश्वत राशि की बरामदगी जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों को अदालत में साबित करने के लिए उससे पूछताछ किया जाना आवश्यक है। इसके अलावा, सीबीआई ने अदालत को अवगत कराया कि आरोपी निलंबित डीआईजी भुल्लर की जमानत याचिका (SLP) पर देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट में 15 सितंबर, 2026 को हुई आंशिक सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील को मौखिक निर्देश दिए गए थे कि वे गवाह राजकुमार से पहले 24 सितंबर, 2026 की निर्धारित तिथि को शिकायतकर्ता आकाश बट्टा की पूछताछ प्रक्रिया पूरी कराएं। चूंकि सुप्रीम कोर्ट में यह मामला 27 अक्टूबर, 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, इसलिए शिकायतकर्ता को 24 सितंबर को ही तलब करने का अनुरोध किया गया था। विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील एस.पी.एस. भुल्लर ने सीबीआई की इस याचिका पर कोई आपत्ति नहीं जताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अर्जी को स्वीकार करते हुए आकाश बट्टा को गवाही के लिए उपस्थित होने का आदेश दे दिया।गौरतलब है कि यह मामला सरहिंद थाने में दर्ज एक प्राथमिकी (FIR) में राहत देने और शिकायतकर्ता के व्यापार के खिलाफ कोई सख्त पुलिस कार्रवाई न करने के बदले बिचौलिए क्रिशानू शारदा के माध्यम से रिश्वत मांगने के आरोपों से संबंधित है। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाकर 16 अक्टूबर, 2025 को बिचौलिए को 5 लाख रुपये की रिश्वत की किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था और उसी दिन डीआईजी भुल्लर को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले में 3 दिसंबर, 2025 को बीएनएसएस (BNSS) की धारा 193 के तहत आरोप पत्र दायर किया जा चुका है और आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं।
Posted By: Daily Suraj Bureau