मानसा में नहीं मचेगी रावण की हुंकार, शोक और तनाव के चलते इस साल रद्द हुआ दशहरा उत्सव
नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद बने तनावपूर्ण और शोक के माहौल को देखते हुए इस साल मानसा में दशहरा का त्योहार नहीं मनाया जाएगा। इस वर्ष दशहरा 20 अक्टूबर को है। वर्तमान स्थिति और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर 'न्यू दशहरा कमेटी' ने यह बड़ा फैसला लिया है। उल्लेखनीय है कि मानसा शहर में आज लगातार तीसरे दिन भी बाजार बंद रखे गए हैं। न्यू दशहरा कमेटी मानसा के प्रधान परवीन कुमार गोयल ने बातचीत करते हुए बताया कि यह फैसला मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए और झोटा की हत्या के गहरे गम में लिया गया है। गोयल ने कहा कि हालात बिल्कुल ठीक नहीं हैं और प्रशासन पहले से ही आशंकाओं से घिरा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यक्रम के दौरान कोई गड़बड़ होती है, तो आयोजकों पर कार्रवाई हो सकती है। परविंदर सिंह झोटा की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए गोयल ने कहा कि वह एक नशा विरोधी कार्यकर्ता थे जो लगातार नशों के खिलाफ काम कर रहे थे और उन्होंने कभी किसी को परेशान नहीं किया था। कमेटी के प्रधान ने यह भी खुलासा किया कि उत्सव की तैयारियों पर पहले ही लगभग 3 लाख रुपये खर्च किए जा चुके थे और रावण के पुतले भी तैयार करवा लिए गए थे, तथा अन्य जरूरी सामान के लिए भी ऑर्डर दिए जा चुके थे। पारंपरिक तौर पर यह दशहरा समारोह नई दाना मंडी में आयोजित किया जाता है, लेकिन इस साल कमेटी ने कार्यक्रम के लिए सिरसा रोड पर 10 से 12 एकड़ के एक निजी प्लॉट का चयन किया था। गोयल ने स्पष्ट किया कि यदि आने वाले दिनों में हालात सामान्य भी हो जाते हैं, तब भी यह आयोजन नहीं किया जाएगा, क्योंकि कमेटी परविंदर झोटा की हत्या के शोक में डूबी हुई है और इस कठिन समय में कोई उत्सव नहीं मनाना चाहती।