राजा वड़िंग के बाद कौन संभालेगा पंजाब कांग्रेस की कमान? दिल्ली में हाईकमान और राज्य के नेताओं की बैठकों का दौर तेज
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी में एक बड़े संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी चल रही है। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पार्टी हाईकमान और शीर्ष नेता राहुल गांधी के साथ चर्चा के लिए दिल्ली तलब किया गया है। अगले 48 घंटे पंजाब कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी विभिन्न गुटों के नेताओं के साथ बैठक कर आपसी सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि सोनिया गांधी के अलावा प्रियंका गांधी भी इस पूरी प्रक्रिया और अंतिम फैसले में गहरी दिलचस्पी ले रही हैं। हालांकि यह लगभग तय हो चुका है कि पंजाब में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बदला जाना है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजा वड़िंग के बाद पंजाब कांग्रेस की कमान किसे सौंपी जाएगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, राजा वड़िंग ने हाल के महीनों में पार्टी के भीतर कुछ विरोध के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, लेकिन हाईकमान के संकेत साफ हैं कि इस अहम चुनाव से पहले राज्य का चेहरा बदला जाना जरूरी है। कांग्रेस की पुरानी परंपरा के तहत किसी भी प्रदेश अध्यक्ष से सीधे तौर पर इस्तीफा नहीं मांगा जाता, बल्कि उन्हें फैसले से अवगत कराया जाता है और वे शीर्ष नेतृत्व से मिलकर एकजुटता का संदेश देते हैं। वड़िंग को भी इस बदलाव के फैसले की जानकारी दे दी गई है और पार्टी में उन्हें कोई अन्य जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। वर्तमान में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित कई प्रमुख नेता हाईकमान के संपर्क में हैं। हालांकि, विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा इससे अलग हैं, क्योंकि पार्टी संभवतः उन्हें इसी भूमिका में बनाए रखेगी। पार्टी के प्रदेश मामलों के प्रभारी सचिन पायलट इस महीने के अंत में राहुल गांधी के पंजाब दौरे से पहले सभी गुटों को एकजुट करने की कवायद में जुटे हैं। न नए नेतृत्व को लेकर जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण भी अहम बने हुए हैं। पार्टी के भीतर पंजाब अलग-अलग क्षेत्रों और गुटों में बंटा हुआ है। माझा क्षेत्र से प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर रंधावा, सुखविंदर सिंह सरकारिया और गुरजीत सिंह औजला प्रमुख हैं। दोआबा क्षेत्र से परगट सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी हैं, जबकि मालवा क्षेत्र से पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला एक मजबूत दावेदार के रूप में देखे जा रहे हैं। सिंगला कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य होने के साथ पार्टी के सह-ख्यूसंची भी हैं और एक प्रमुख हिंदू चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। वहीं, पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी प्रभावशाली दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसकी राज्य में बड़ी आबादी है। इसके अलावा, परगट सिंह, सरकारिया और औजला जैसे कई नेता जाट सिख बिरादरी से आते हैं, जिन्हें पहले ही 2027 के चुनावों के लिए घोषणापत्र समिति का सह-अध्यक्ष बनाया जा चुका है। हाईकमान के साथ चल रही इन बैठकों के बाद जल्द ही नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर औपचारिक मुहर लगने की उम्मीद है।