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गेहूं की एमएसपी में 25 रुपये की मामूली वृद्धि; कुसुम (सैफ्लावर) के भाव में सबसे ज्यादा 675 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा

30 Sep, 2026 03:27 PM

केंद्र सरकार ने बुधवार को आगामी विपणन सीजन 2027-28 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत तिलहन फसल कुसुम (सैफ्लावर) के भाव में सबसे अधिक 675 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। सरकार का कहना है कि इस बढ़ोतरी का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य दिलाना और पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण (क्रॉप डायवर्सिफिकेशन) को बढ़ावा देना है। एक आधिकारिक सरकारी बयान के अनुसार, रेपसीड और सरसों के भाव में 413 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है, जिससे इसका नया एमएसपी 6,613 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इसके अलावा, मसूर की दाल के एमएसपी में 390 रुपये की वृद्धि कर इसे 7,390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। जौ की एमएसपी में 136 रुपये का सुधार करते हुए इसे 2,286 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जबकि चने के भाव में 83 रुपये की बढ़ोतरी के बाद इसका समर्थन मूल्य 5,958 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। रबी की मुख्य फसल गेहूं के एमएसपी में सबसे कम 25 रुपये की मामूली वृद्धि की गई है, जिससे अब गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। सरकार ने अनाज के अलावा अन्य फसलों विशेषकर दलहन और तिलहन के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के अपने प्रयासों के तहत इन फसलों के एमएसपी में विशेष जोर देते हुए बढ़ोतरी की है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं की कुल खरीद 3,715 लाख मीट्रिक टन दर्ज की गई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के पिछले दशक के दौरान यह आंकड़ा 2,254 लाख मीट्रिक टन था। बयान के अनुसार, वर्ष 2014-15 से 2025-26 की अवधि के दौरान गेहूं उत्पादक किसानों को एमएसपी के रूप में कुल 7.31 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जो कि 2004-05 से 2013-14 के बीच 2.56 लाख करोड़ रुपये था। इसके अलावा, रबी की सभी छह प्रमुख फसलें उगाने वाले किसानों के लिए यह कुल भुगतान राशि 2.65 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 8.36 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

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