कनाडा के टोरंटो में भारतीय मूल के तकनीकी नेताओं का सम्मान; 'कनाडा इंडिया टेक काउंसिल' ने आयोजित किया तीसरा सालाना अवार्ड गाला
भारत और कनाडा के बीच आर्थिक और व्यावसायिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में तकनीक, नवाचार और कुशल प्रतिभा की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसी सोच को मजबूत करते हुए कनाडा इंडिया टेक काउंसिल (CITC) की ओर से टोरंटो में अपना तीसरा सालाना अवार्ड गाला अत्यंत भव्य तरीके से आयोजित किया गया। टेल्लस हार्बर में हुए इस विशेष कार्यक्रम में कनाडा में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश के. पटनायक और टोरंटो में भारत के कौंसल जनरल महावीर सिंहवी ने विशेष रूप से शिरकत की। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में कनाडा भर से आए विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों के 200 से अधिक विशेषज्ञों, मुख्य सूचना अधिकारियों (CIO), मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारियों (CTO) और शीर्ष तकनीक नेताओं ने हिस्सा लिया। इस साल के आयोजन का मुख्य विषय (थीम) “लीडरशिप एट द एज” रखा गया था। काउंसिल ने प्रौद्योगिकी नेतृत्व के चार महत्वपूर्ण स्तंभों—बदलाव, लचीलेपन, भरोसे और मूल्य सृजन को प्रमुखता से उजागर किया। अपने संबोधन में भारतीय प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत आर्थिक विकास के लिए दोनों देशों को ज्ञान, कौशल और उद्यमिता के आदान-प्रदान को और अधिक गति देनी चाहिए। समारोह के दौरान कनाडा के प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दे रहे प्रमुख भारतीय मूल के नेताओं को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले दिग्गजों में पल्लवी त्रिपाठी (सीआईओ, सीआईबीसी), विनीत गुप्ता (ग्लोबल सीआईओ, नॉर्थ वेस्ट कंपनी), सोनाली कोहली (सीआईओ, नियाग्रा हेल्थ) और पीटर सिंह (सीटीओ, टोरंटो डिस्ट्रिक्ट स्कूल बोर्ड) सहित 12 अन्य वरिष्ठ प्रौद्योगिकी नेता शामिल रहे। इन सभी नेताओं का चयन सीआईटीसी के विशेषज्ञ सलाहकार बोर्ड द्वारा किया गया था। यह कार्यक्रम केवल एक पुरस्कार समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कनाडा के तकनीकी क्षेत्र में काम कर रहे पेशेवरों के लिए आपसी मेल-जोल और भविष्य के सहयोग का एक सशक्त मंच बनकर उभरा है। उल्लेखनीय है कि सीआईटीसी द्वारा लगातार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्लीनटेक, एग्रीटेक और डीपटेक जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में दोनों देशों की साझदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। टोरंटो का यह आयोजन इस बात का स्पष्ट संदेश देता है कि भारत-कनाडा के संबंधों में तकनीक अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की नई संभावनाओं का एक मजबूत सेतु बन रही है।