लहरगागा सड़क हादसा: तेज रफ्तार कार ने मनरेगा मजदूरों को रौंदा, 9 की मौत और 12 घायल; सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप
पंजाब के संगरूर जिले के लहरगागा-जाखल मार्ग पर पिंडे गांव अलीशेर के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है। यहाँ एक तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे काम कर रहे मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे 9 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 12 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह भयानक घटना उस समय घटी जब करीब दो दर्जन मजदूर 'विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण' (वीबी-जी राम जी) के तहत सड़क के किनारे अपना कार्य कर रहे थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ मजदूर सड़क के किनारे बैठे हुए थे, तभी जाखल की तरफ से आ रही एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार कार सीधे मजदूरों पर चढ़ गई। हादसे को अंजाम देने के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। सुरक्षा नियमों की घोर अनदेखी और लापरवाही के आरोप पीड़ितों के परिजनों और यूनियन सदस्यों ने संबंधित एजेंसी पर सड़क सुरक्षा के अनिवार्य नियमों की सरेआम अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि काम कर रहे मजदूरों की जान की सुरक्षा के लिए किसी भी तरह के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। परिजनों ने खुलासा किया कि काम कर रहे किसी भी मजदूर को चमकीली रिफ्लेक्टिव जैकेट नहीं दी गई थी, जिससे दूर से आ रहे वाहन चालकों को मजदूरों की मौजूदगी का पता चल सके। इसके अलावा, वाहन चालकों को आगे चल रहे निर्माण या सफाई कार्य के प्रति सचेत करने के लिए कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए थे। सड़क पर यातायात को काम वाली जगह से सुरक्षित दूरी पर रखने के लिए न तो कोन और न ही बैरीकेड की व्यवस्था की गई थी। साथ ही, यातायात को नियंत्रित करने के लिए मौके पर कोई प्रशिक्षित ट्रैफिक मार्शल या झंडी दिखाने वाला कर्मचारी भी तैनात नहीं था। छुट्टी के दिन काम कराने पर उठे सवाल यूनियन के सदस्यों ने इस बात पर भी कड़ा रोष जताया कि आखिर छुट्टी के दिन (रविवार को) सड़क के किनारे से घास-फूस हटाने का कार्य किसके आदेशों पर करवाया जा रहा था। उन्होंने सवाल किया कि यदि दृश्यता कम थी या काम करना असुरक्षित था, तो काम को समय पर रोका क्यों नहीं गया? यूनियन ने इस पूरी घटना के लिए जिम्मेदार लोगों और एजेंसियों की जवाबदेही तय करने तथा भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही, सरकार और प्रशासन से अपील की गई है कि इस हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के पीड़ित परिवारों और घायलों को बिना किसी देरी के उचित मुआवजा व आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।