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मोहाली: कंज्यूमर कमीशन का बड़ा फैसला, विधायक कुलवंत सिंह की फर्म जेएलपीएल (JLPL) पर 75 हजार का जुर्माना

16 Oct, 2026 09:54 AM

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मोहाली से विधायक कुलवंत सिंह की रियल एस्टेट फर्म जनता लैंड प्रमोटर्स लिमिटेड (JLPL Mohali) के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने सेक्टर 66 स्थित गैलेक्सी हाइट्स में बिना ऑक्यूपेशन और कंप्लीशन सर्टिफिकेट के फ्लैट का कब्जा सौंपने के मामले में फर्म को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने सेक्टर 66 के निवासी और शिकायतकर्ता कुलदीप सिंह को 42,13,678 रुपये की राशि पर 9 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने रियल एस्टेट फर्म को मानसिक परेशानी, भागदौड़ और मुकदमे के खर्चे के रूप में 75,000 रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश जारी किया है। बुनियादी सुविधाएं देने और सर्टिफिकेट प्राप्त करने के निर्देश आयोग ने जेएलपीएल (JLPL) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को ब्रोशर में वादा की गई सभी बुनियादी सुविधाएं और सहूलियतें प्रदान करे, जिसमें मौजूदा कमियों को दूर करना भी शामिल है। इसके अलावा, अदालत का आदेश मिलने की तिथि से तीन महीने के भीतर सक्षम अधिकारियों से ऑक्यूपेशन और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (कब्जा और पूर्णता प्रमाण पत्र) प्राप्त करने का निर्देश दिया गया है। शिकायतकर्ता कुलदीप सिंह ने आयोग को बताया था कि उन्होंने 1 अगस्त 2015 को गैलेक्सी हाइट्स की छठी मंजिल पर 42,13,678 रुपये में एक फ्लैट बुक किया था, जिसकी कब्जा देने की निर्धारित तिथि 30 जुलाई 2018 तय की गई थी। हालांकि, कंपनी ने उन्हें 5 दिसंबर 2022 को बिना किसी ऑक्यूपेशन या कंप्लीशन सर्टिफिकेट के फ्लैट का कब्जा सौंप दिया। शिकायतकर्ता ने सेवाओं में कमी और "एक पार्किंग की जगह को दो में बदलने" का गंभीर आरोप भी लगाया था। सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने दी राहत अपने 5 अक्टूबर के फैसले में उपभोक्ता आयोग ने इसे जेएलपीएल (JLPL) के हिस्से की ओर से 'सेवा में कमी' (Deficiency in Service) करार दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि "शिकायतकर्ता ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त होने के बाद ही मेंटेनेंस चार्ज देने के लिए जवाबदेह होंगे।" अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि विरोधी पक्ष द्वारा कब्जा प्रमाण-पत्र और पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त किए बिना तथा बुनियादी सुविधाओं की अनुपस्थिति में यूनिट का वास्तविक कब्जा न देना सेवा में स्पष्ट कमी है। इसलिए न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता को उसकी यूनिट के लिए जमा करवाई गई 42,13,678 रुपये की राशि पर, कब्जा देने की तय तारीख (30 जुलाई 2018) के बाद से 9% सालाना की दर से ब्याज दिया जाए।

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