कनाडा: प्रेम संबंधों में बढ़ रहा शारीरिक और मानसिक शोषण, सोशल मीडिया और पोर्नोग्राफी बनी बड़ी वजह
कनाडा में युवाओं और किशोरों के प्रेम संबंधों (डेटिंग) में हिंसा का स्तर लगातार चिंताजनक रूप लेता जा रहा है। 'कनैडियन पीडियाट्रिक सोसाइटी' (CPS) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर तीन में से एक युवा को अपने डेटिंग या प्रेम संबंधों के दौरान किसी न किसी प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ा है। इस हिंसा में शारीरिक और यौन शोषण के अलावा मानसिक प्रताड़ना, पीछा करना (स्टॉकिंग) और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी गंभीर गतिविधियां शामिल हैं। इस रिपोर्ट ने देश के अभिभावकों, शिक्षकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया और हिंसक कंटेंट बने मुख्य कारण कनैडियन पीडियाट्रिक सोसाइटी की युवा स्वास्थ्य समिति की प्रमुख डॉ. मेगन हैरिसन के अनुसार, स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े पेशेवरों के पास युवाओं के प्रेम संबंधों में हिंसा से जुड़े मामले लगातार आ रहे हैं। इस समस्या के पीछे किशोरों द्वारा सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक का अत्यधिक उपयोग एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है। इसके साथ ही, ओटावा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ट्रेसी वैलेनकोर्ट ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हिंसक कंटेंट और अश्लील सामग्री पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि इस तरह की सामग्री लड़कियों और महिलाओं के प्रति युवाओं की मानसिकता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है, जिससे आपसी संबंधों में सम्मान और संवेदनशीलता की कमी आती है। गरीबी, भेदभाव और घरेलू माहौल से बढ़ता जोखिम विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि यह समस्या किसी भी वर्ग के युवा के साथ हो सकती है, लेकिन कुछ विशेष पृष्ठभूमि वाले युवाओं को इसका अधिक खतरा रहता है। मैकगिल विश्वविद्यालय में बाल एवं किशोर मनोविज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. सेसिल रूसो के अनुसार, गरीबी, सामाजिक भेदभाव और हाशिए पर रहने वाले परिवारों के बच्चे अधिक संवेदनशील होते हैं। जो बच्चे पहले से ही घरेलू हिंसा का सामना कर रहे हैं या स्कूल में सहपाठियों द्वारा अलग-थलग किए जाते हैं, उनके भविष्य में हिंसक रिश्तों में फंसने की संभावना काफी बढ़ जाती है। रूटीन चेकअप के दौरान परामर्श देने की सिफारिश समस्या से निपटने के लिए कनैडियन पीडियाट्रिक सोसाइटी ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों को सलाह दी है कि वे युवाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच (रूटीन चेकअप) के दौरान उनसे स्वस्थ और सुरक्षित संबंधों पर खुलकर बात करें। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर डॉक्टरों और मरीजों के बीच इस विषय पर सामान्य रूप से बात होगी, तो युवाओं का विश्वास बढ़ेगा और पीड़ित किशोर बिना किसी डर के अपनी बात साझा कर सकेंगे। हालांकि, प्रोफेसर ट्रेसी वैलेनकोर्ट और अन्य विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल युवाओं से सवाल पूछना ही काफी नहीं है, बल्कि समस्या सामने आने पर उन्हें तुरंत सहायता और सुरक्षा भी मुहैया कराई जानी चाहिए। रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यही है कि युवाओं को सुरक्षित संबंधों के प्रति जागरूक करना केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।