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चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: वोटर फॉर्म 6 से हटाया गया विवादित घोषणा पत्र, नए मतदाताओं को मिलेगी राहत

30 Sep, 2026 05:57 PM

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने ऑनलाइन 'फॉर्म 6' से जुड़े उस विवादास्पद घोषणा पत्र को वापस ले लिया है, जिसका उपयोग नए मतदाताओं द्वारा मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए किया जाता था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गत 26 सितंबर को आयोजित आयोग की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि जिन राज्यों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है या जहां इसे शुरू किया जाना है, वहां अब इस अतिरिक्त घोषणा पत्र की कोई आवश्यकता नहीं होगी। आयोग द्वारा सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि एसआईआर (SIR) या गैर-एसआईआर अवधि के दौरान फॉर्म 6 के मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिन राज्यों में पहले एसआईआर प्रक्रिया कराई गई थी, वहां यह अतिरिक्त दस्तावेज अनिवार्य रूप से मांगा जा रहा था। हालांकि, 26 सितंबर को इस अनिवार्यता को हटाने का निर्णय तो ले लिया गया था, परंतु आयोग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक प्रेस नोट में इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था, जिसके चलते स्थिति में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। मौजूदा स्थिति के तहत, जिन राज्यों में एसआईआर का कार्य पूरा हो चुका है, वहां ईसीनेट (ECNet) ऐप और आधिकारिक पोर्टल से इस अतिरिक्त घोषणा पत्र को हटा दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप, अब नए आवेदकों को केवल वर्ष 1960 के नियमों के तहत निर्धारित मूल कानूनी 'फॉर्म 6' ही भरना होगा। हालांकि, जिन क्षेत्रों या राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया अभी भी जारी है, वहां यह घोषणा पत्र फिलहाल पोर्टल पर मौजूद है। यह प्रशासनिक बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव पैनल के भीतर ही फॉर्म 6 में किए गए संशोधनों को लेकर आंतरिक मतभेद और विवाद की स्थिति खड़ी हो गई थी। चुनाव आयुक्तों—एस.एस. संधू और विवेक जोशी—ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई थी कि विधिवत नियमों में संशोधन किए बिना फॉर्म में इस प्रकार के बदलाव नहीं किए जाने चाहिए। इसके अलावा, पूर्व चुनाव आयोग अधिकारी अशोक लवासा ने भी इस पूरे प्रकरण पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस घोषणा पत्र के माध्यम से मांगी जाने वाली जानकारी का मतदाता की मूल पात्रता से कोई सीधा संबंध नहीं है, और यह प्रावधान पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए अनावश्यक बाधाएं पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया था कि आयोग की ओर से घोषित की गई तथाकथित 'छूट' केवल जनता को भ्रमित करने और जनभावनाओं को संभालने का एक प्रयास मात्र हैं।

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